Basant Rituraj hidi kavita;21st Century -मौसम निरसता

April 11, 2019
सर्दियों  का मौसम अपने ढलान पर होता है सुबह जल्दी होना,शाम का  जल्दी ना आना इंतजार से भी लम्बे दिन बसंत ऋतु के आगमन  का संकेत देने लगते है |  पेड़ों पर नए पत्तो की कपोलें प्रकृति के यौवन  का श्रृंगार करती  है |  मनुष्य जीवन में यौवन अति प्रिय और महत्त्व पूर्ण होता  है |  ऋतुओं का यौवन बसंत है जिस प्रकार यौवन और सौंदर्य कवियों का लोक प्रिये विषय  रहा है |  उसी प्रकार ऋतुराज बसंत भी कवियों का  दुलारा विषय है बसंत ऋतु में चारों ओर हरियाली; रंग-बिरंगे फूलो की श्रृंखला,खेतों में पकी हुई फसलें, लगता है सोने के भंडार है |  ये सारे मन मोहक दृश्य काव्य प्रेमियों,विशेष कर कवियों को आकर्षित करती रही है। 

कवि ने मौसम को जीवन के भौतिकता के साथ कैसे संजोया है आओ कवि  की लेखनी से देखते है | 

मौसम बसंत ऋतुराज


Basant Rituraj kavita shrrnkhala, Materialism dominance
basant rituraj


मौसम

व्यस्तता  से पूर्ण  जीवन शैली ।
मौसम की खुश्बू अब कहाँ फैली।।
ऋतुएँ  प्रफुल्लित हो पर्यटन  बनी
नव-भाव-वसन जरूरतें  करती मैली।।
अपनी  खुशियों को निचोड़  कर।
निरसता का रसपान कर।।
ठंडी,गर्मी, बरसात बसंत जो है  रितुराज।
सब निरस है भौतिकता का मौसम
अब आता ही जाता।
निसहाय इच्छाएँ बनी पथ
बिन चाह पग  बढ़ा जाता।।
समस्याओं की हरियाली
पतझड़  इन पर ना आता।
बड़ी  हो कार,ऊंची मंजिल मकान
स्वयं पत्थर बन
दिवारों में गढ़ता जाता।।

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