गज़ल|Dard shayari

March 17, 2019

गज़ल  Dard Shayari


Gajal,Dard shayari
Gajal



सर ना झुकाऊ उसके दर पर।
उम्र खत्म हुई इसे कमाने में।।
ये मगरूर का सर नहीं,
खुद्दारी का जुनून है।
यही बचा मेरे खजाने में |


Gajal,Dard shayari
GAJAL


संभल कर प्यार कर,
नादान तू नहीं जानता।
होते हैं फरेब उसके मुस्कराने में।

Gajal,Dard shayari
gajal


तरक्की की बुलंदियाँ छू
 दुश्मन जल जायेंगे।

लकड़ियाँ नहीं चाहिए उन्हें जलाने में।।

वफ़ा की ज़फा का इल्जाम लगा।
शायद मेरी वफ़ा नहीं उसके पैमाने में।


गज़ल,दर्द भरी शायरी
gajal


बुढ़ापा खा रहा ठोकरे जिनसे।
बुढ़ापा आया है उन्हें खिलाने में।।

gajal,दर्द भरी शायरी
दर्द भरी शायरी

कुछ मजबूरियाँ रही होगी उसकी

बेवफा ना कहना कभी अफ़साने में


GAJAL,दर्द भरी शायरी
GAJAL


प्यार था मुझे उससे बहुत।
उम्र गुजर गई ये बताने में।

Dard shayari


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